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CTET · UPTET · CDP Practice

जीन पियाजे — संज्ञानात्मक विकास
MCQ प्रैक्टिस टेस्ट

पिछले वर्षों के CTET / UPTET प्रश्नपत्रों से चुने गए 10 प्रश्न · हिंदी में व्याख्या सहित

📖 इस टेस्ट के बारे में: यह प्रैक्टिस टेस्ट CTET Paper 1 & Paper 2 तथा UPTET के बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP) खंड में जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत पर आधारित पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्नों का संग्रह है। हर प्रश्न के बाद "उत्तर जाँचें" दबाएँ — सही उत्तर की विस्तृत व्याख्या और शेष तीन विकल्पों के गलत होने का कारण भी मिलेगा। यह अनूठी विधि EduBrightPages द्वारा प्रस्तुत की गई है जो आपकी नॉलेज को रिफाइन करती है।

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प्रश्न 01 / 10
जागृति को पता चल गया कि उसका कुत्ता रस्टी एक गोल्डन रिट्रीवर है। जब वह एक और कुत्ते को देखती है जो रस्टी जैसा दिखता है लेकिन एक अलग नस्ल का है, तो वह उसे भी "कुत्ता" ही समझती है। जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार यह किस अवधारणा को प्रदर्शित करता है?
✔ सही उत्तर — A. समायोजन (Accommodation)
पियाजे के अनुसार समायोजन (Accommodation) वह संज्ञानात्मक प्रक्रिया है जिसमें बच्चा नई जानकारी को फिट करने के लिए अपनी मौजूदा स्कीमा (मानसिक संरचना) को बदलता या विस्तारित करता है। जागृति के पास "कुत्ता" की एक स्कीमा है जो रस्टी पर आधारित है। जब वह एक अलग नस्ल के कुत्ते को देखती है और उसे भी "कुत्ता" कहती है, तो वह अपनी स्कीमा का विस्तार कर नई विशेषताओं को उसमें समाहित कर रही है — यही Accommodation है।

स्रोत: Piaget, J. (1952). The Origins of Intelligence in Children. पियाजे ने Assimilation और Accommodation को संज्ञानात्मक अनुकूलन (Cognitive Adaptation) के दो पूरक रूप बताए।
✗ गलत विकल्पों का विश्लेषण
B. केंद्रता (Centration): यह पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था की विशेषता है जिसमें बच्चा किसी स्थिति के केवल एक पहलू पर ध्यान देता है। यहाँ जागृति कई कुत्तों की श्रेणी बना रही है, एक पहलू पर नहीं अटक रही — इसलिए यह गलत है।
C. वस्तु स्थायित्व (Object Permanence): यह संवेदी-चालक अवस्था (0–2 वर्ष) की उपलब्धि है — बच्चा समझता है कि वस्तुएँ नजरों से ओझल होने पर भी अस्तित्व में रहती हैं। इसका इस प्रश्न से कोई संबंध नहीं।
D. संरक्षण (Conservation): यह मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था की अवधारणा है जिसमें बच्चा समझता है कि आकार बदलने पर भी मात्रा/संख्या/द्रव्यमान एक समान रहता है। जागृति की स्थिति में कोई मात्रा-परिवर्तन नहीं हो रहा — इसलिए यह गलत है।
📚 स्रोत: Piaget, J. (1952); Santrock, J.W. — Educational Psychology; NCERT बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP)
प्रश्न 02 / 10
जीन पियाजे के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सी क्षमताएँ पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था की विशेषता हैं?
✔ सही उत्तर — A. प्रतीकात्मक खेल और जीववाद
पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (2–7 वर्ष) में बच्चे की दो प्रमुख विशेषताएँ हैं:
प्रतीकात्मक खेल (Symbolic Play): बच्चा वस्तुओं या शब्दों को प्रतीक के रूप में उपयोग करने लगता है (जैसे — लकड़ी को घोड़ा मानकर खेलना)। यह भाषा और कल्पना के विकास का आधार है।
जीववाद (Animism): बच्चा निर्जीव वस्तुओं में भी जीवन और भावनाएँ मानता है (जैसे — "बादल रो रहा है")।

ये दोनों विशेषताएँ पियाजे ने इसी अवस्था की पहचान के रूप में वर्णित की हैं।
✗ गलत विकल्पों का विश्लेषण
B. वर्गीकरण और क्रमबद्धता: ये क्षमताएँ मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (7–11 वर्ष) में विकसित होती हैं। इस अवस्था में बच्चा वस्तुओं को वर्गों में रखना और क्रम से लगाना सीखता है।
C. संरक्षण और अमूर्त चिंतन: संरक्षण मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था में आता है; अमूर्त चिंतन औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (11+ वर्ष) की विशेषता है। दोनों पूर्व-संक्रियात्मक में अनुपस्थित हैं।
D. नकल और प्रतिवर्तनीयता: नकल (Deferred Imitation) संवेदी-चालक अवस्था के अंत में शुरू होती है। प्रतिवर्तनीयता (Reversibility) मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था की उपलब्धि है — पूर्व-संक्रियात्मक बच्चे में यह अनुपस्थित होती है।
📚 स्रोत: Piaget, J. (1962) — Play, Dreams and Imitation in Childhood; NCERT CDP कक्षा 1–8
प्रश्न 03 / 10
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत शिक्षा के संदर्भ में यह बताता है कि —
✔ सही उत्तर — B. पाठ्यक्रम बच्चों के विकास चरण अनुसार
पियाजे के सिद्धांत की सबसे बड़ी शैक्षिक देन है — stage-based curriculum की अवधारणा। क्योंकि बच्चों की सोच हर अवस्था में गुणात्मक रूप से भिन्न होती है, इसलिए पाठ्यक्रम बच्चे की संज्ञानात्मक परिपक्वता के अनुसार डिजाइन होना चाहिए। उदाहरण के लिए: 5 वर्ष के बच्चे को अमूर्त बीजगणित नहीं पढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि वह पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में है। यही विचार NCERT की NCF 2005 और NEP 2020 का भी आधार है।
✗ गलत विकल्पों का विश्लेषण
A. दंड और पुरस्कार: यह व्यवहारवाद (Behaviourism) — विशेष रूप से Skinner के Operant Conditioning — का विचार है, पियाजे का नहीं। पियाजे बाहरी पुरस्कारों की बजाय आंतरिक जिज्ञासा और अन्वेषण को महत्त्व देते थे।
C. जटिल से सरल: यह पियाजे के विचार के विपरीत है। पियाजे एवं शिक्षाशास्त्र दोनों सरल से जटिल (Simple to Complex) की ओर बढ़ने की वकालत करते हैं — scaffolding की भी यही दिशा है।
D. परिणाम पर ध्यान: पियाजे का मानना था कि बच्चा सक्रिय अन्वेषण (active exploration) से सीखता है — अतः प्रक्रिया (process) अधिक महत्त्वपूर्ण है। यह विकल्प पियाजे की constructivist सोच के विरुद्ध है।
📚 स्रोत: NCERT — Child Development and Pedagogy; NCF 2005; Piaget & Inhelder (1969) — The Psychology of the Child
प्रश्न 04 / 10
पियाजे और वायगोत्स्की के सिद्धांतों में एक प्रमुख समानता है —
✔ सही उत्तर — C. बच्चों की स्वयं की शिक्षा में संलग्नता
पियाजे और वायगोत्स्की दोनों रचनावादी (Constructivist) विचारधारा के प्रतिनिधि हैं। दोनों मानते थे कि बच्चा सक्रिय रूप से अपने ज्ञान का निर्माण करता है — वह passive receiver नहीं है। पियाजे के लिए यह निर्माण व्यक्तिगत अन्वेषण (individual exploration) से होता है; वायगोत्स्की के लिए यह सामाजिक संवाद (social interaction) से होता है — लेकिन दोनों में बच्चे की सक्रिय भागीदारी (active engagement) केंद्रीय है।
✗ गलत विकल्पों का विश्लेषण
A. भाषा और विचार: यहाँ दोनों में मतभेद है — पियाजे के अनुसार विचार पहले आता है और भाषा उसे व्यक्त करती है; वायगोत्स्की के अनुसार भाषा और विचार का सम्बन्ध अधिक जटिल है और भाषा सोच को आकार देती है। यह समानता नहीं, विरोधाभास है।
B. चरण-जैसी प्रगति: पियाजे ने चार निश्चित क्रमिक अवस्थाएँ दीं; वायगोत्स्की ने विकास के चरणों पर जोर नहीं दिया — उनका ध्यान ZPD और सामाजिक संदर्भ पर था। यह पियाजे की विशेषता है, दोनों की समानता नहीं।
D. संस्कृति की भूमिका: यह वायगोत्स्की की विशेष देन है। पियाजे संज्ञानात्मक विकास को काफी हद तक सार्वभौमिक जैविक प्रक्रिया मानते थे और संस्कृति की भूमिका को उतना महत्त्व नहीं देते थे।
📚 स्रोत: Vygotsky, L.S. (1978) — Mind in Society; Piaget (1952); Woolfolk, A. — Educational Psychology
प्रश्न 05 / 10
जीन पियाजे के अनुसार बच्चे वयस्कों से किस प्रकार भिन्न हैं?
✔ सही उत्तर — C. गुणात्मक रूप से भिन्न
पियाजे का सबसे क्रांतिकारी विचार यह था कि बच्चे "छोटे वयस्क" नहीं हैं। उनकी सोच वयस्कों से गुणात्मक (qualitatively) भिन्न है — अर्थात बच्चे और वयस्क केवल ज्ञान की मात्रा में नहीं, बल्कि सोचने के तरीके में भी अलग होते हैं। एक 5 वर्षीय बच्चे की तार्किक संरचना एक वयस्क से मूलतः अलग है — जैसे वह संरक्षण, प्रतिवर्तनीयता आदि को नहीं समझता। यही पियाजे के "Stages" का आधार है।
✗ गलत विकल्पों का विश्लेषण
A. निर्भरता बनाम स्वतंत्रता: यह मनोवैज्ञानिक या सामाजिक दृष्टिकोण हो सकता है, लेकिन पियाजे के सिद्धांत का विषय संज्ञानात्मक (cognitive) भिन्नता है, न कि निर्भरता।
B. वयस्क अधिक ज्ञानी: यह एक साधारण तथ्य है जो पूर्व-पियाजेयन सोच थी — "बच्चे = कम ज्ञान वाले वयस्क"। पियाजे ने इसी धारणा को चुनौती दी और कहा कि अंतर ज्ञान की मात्रा का नहीं, सोच की संरचना का है।
D. मात्रात्मक भिन्नता: यदि अंतर केवल मात्रात्मक (quantitative) होता तो बच्चे सिर्फ "कम ज्ञानी" होते। पियाजे का मौलिक योगदान यही है कि अंतर गुणात्मक है — बच्चे अलग तरह से सोचते हैं।
📚 स्रोत: Piaget, J. (1952) — The Origins of Intelligence in Children; Berk, L. — Child Development (8th ed.)
प्रश्न 06 / 10
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सी क्षमता मूर्त-संक्रियात्मक सोच को पूर्व-संक्रियात्मक सोच से अलग करती है?
✔ सही उत्तर — B. विकेंद्रण (Decentration)
पूर्व-संक्रियात्मक बच्चे में केंद्रता (Centration) होती है — वह किसी स्थिति के केवल एक पहलू पर ध्यान देता है। मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था में बच्चा विकेंद्रण (Decentration) करने में सक्षम हो जाता है — अर्थात वह एक साथ कई पहलुओं पर विचार कर सकता है। यही क्षमता संरक्षण (Conservation) को भी संभव बनाती है। यही अंतर इन दोनों अवस्थाओं को अलग करता है।
✗ गलत विकल्पों का विश्लेषण
A. इंद्रियों का समन्वय: यह संवेदी-चालक अवस्था (0–2 वर्ष) की विशेषता है जिसमें बच्चा देखना, सुनना, पकड़ना आदि क्रियाओं को जोड़ना सीखता है। यह मूर्त और पूर्व-संक्रियात्मक में अंतर करने से संबंधित नहीं है।
C. परिकल्पित तार्किकता: यह औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (11+ वर्ष) की विशेषता है जिसमें बच्चा "क्या होगा अगर..." (hypothetical) प्रश्नों पर अमूर्त रूप से सोच सकता है।
D. वस्तु स्थायित्व: यह संवेदी-चालक अवस्था में लगभग 8–12 महीने की आयु में विकसित होती है — यह पूर्व/मूर्त-संक्रियात्मक के बीच का भेद नहीं है।
📚 स्रोत: Piaget, J. (1964) — Development and Learning; NCERT CDP; Santrock (2011) — Educational Psychology
प्रश्न 07 / 10
जीन पियाजे का मानना था कि ज्ञान —
✔ सही उत्तर — A. बच्चों द्वारा सक्रिय रूप से निर्मित
पियाजे के रचनावाद (Constructivism) का मूल सिद्धांत है: बच्चा ज्ञान का सक्रिय निर्माता है, निष्क्रिय प्राप्तकर्ता नहीं। वह पर्यावरण के साथ अन्तःक्रिया (assimilation + accommodation) के माध्यम से अपनी मानसिक संरचनाएँ (schemas) विकसित करता है। ज्ञान बाहर से "डाला" नहीं जाता, बच्चा उसे भीतर से "बनाता" है।
✗ गलत विकल्पों का विश्लेषण
B. जन्मजात ज्ञान: यह Nativist/Rationalist (जैसे Chomsky) का दृष्टिकोण है। पियाजे के अनुसार ज्ञान जन्मजात नहीं होता — वह अनुभव और अन्वेषण से बनता है।
C. सामाजिक सह-निर्माण: यह वायगोत्स्की का विचार (Social Constructivism) है। पियाजे ज्ञान-निर्माण को मुख्यतः व्यक्तिगत संज्ञानात्मक प्रक्रिया मानते थे, सामाजिक नहीं।
D. व्यवहार परिवर्तन जो मापा जा सके: यह व्यवहारवाद (Behaviourism) की परिभाषा है — विशेष रूप से B.F. Skinner की। पियाजे आंतरिक मानसिक संरचनाओं में रुचि रखते थे, बाहरी मापनीय व्यवहार में नहीं।
📚 स्रोत: Piaget, J. (1970) — Piaget's Theory; Von Glasersfeld, E. — Radical Constructivism; NCERT बाल विकास
प्रश्न 08 / 10
जीन पियाजे के अनुसार, चिह्न के लिए चिह्न का प्रयोग करने की क्षमता (जैसे — अक्षर 'x' को अज्ञात अंक के लिए मानने की क्षमता) ___ के दौरान विकसित होती है और विद्यार्थियों को ___ सीखने में सक्षम बनाती है।
✔ सही उत्तर — C. औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था — बीजगणित
औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (11+ वर्ष) में बच्चा अमूर्त प्रतीकात्मक तर्क (abstract symbolic reasoning) कर सकता है। 'x' एक अमूर्त चिह्न है जो किसी अज्ञात मान को दर्शाता है — यह विशुद्ध अमूर्त सोच है। बीजगणित (Algebra) और तार्किक गणनाएँ इसी क्षमता पर निर्भर हैं। मूर्त-संक्रियात्मक बच्चा ठोस वस्तुओं पर सोच सकता है, लेकिन अमूर्त प्रतीकों पर नहीं।
✗ गलत विकल्पों का विश्लेषण
A. मूर्त + बीजगणित: मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (7–11 वर्ष) में बच्चा ठोस (concrete) वस्तुओं पर तर्क कर सकता है, लेकिन 'x' जैसे अमूर्त प्रतीक अभी भी उसकी पहुँच से बाहर हैं।
B. मूर्त + संरक्षण/क्रमबद्धता: संरक्षण और क्रमबद्धता मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था में ही आते हैं — लेकिन अमूर्त प्रतीकात्मक क्षमता उस अवस्था में नहीं होती।
D. औपचारिक + संरक्षण/क्रमबद्धता: संरक्षण और क्रमबद्धता पहले से ही मूर्त-संक्रियात्मक में विकसित हो जाते हैं। ये औपचारिक अवस्था की नई उपलब्धि नहीं हैं।
📚 स्रोत: Piaget & Inhelder (1958) — The Growth of Logical Thinking; Woolfolk — Educational Psychology; NCERT CDP
प्रश्न 09 / 10
जीन पियाजे के अनुसार, पूर्व-संक्रियात्मक चिंतन की मुख्य विशेषताओं में से एक ___ है, जो किसी स्थिति के एक पहलू पर ध्यान केंद्रित करने और दूसरों की उपेक्षा करने की प्रवृत्ति को संदर्भित करता है।
✔ सही उत्तर — B. केंद्रता (Centration)
केंद्रता (Centration) पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था की एक प्रमुख सीमा है। इसमें बच्चा किसी स्थिति के केवल एक ही पहलू पर ध्यान केंद्रित करता है और बाकी पहलुओं को नजरअंदाज करता है। उदाहरण: जब एक लंबे पर पतले गिलास और एक चौड़े पर छोटे गिलास में समान पानी डाला जाए, तो बच्चा ऊँचाई देखकर कहेगा "इसमें पानी ज्यादा है" — चौड़ाई को नजरअंदाज करके। यही संरक्षण (Conservation) के न समझ पाने का कारण है।
✗ गलत विकल्पों का विश्लेषण
A. कारण-परिणाम का विश्लेषण: यह उच्च-स्तरीय तार्किक सोच है जो मूर्त और औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्थाओं में विकसित होती है। पूर्व-संक्रियात्मक बच्चा transductive reasoning करता है (विशेष से विशेष), कारण-परिणाम की तार्किक श्रृंखला नहीं।
C. विकेंद्रता (Decentration): यह मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था में आने वाली उपलब्धि है — बच्चा एक साथ कई पहलुओं पर विचार कर सकता है। यह केंद्रता का विपरीत है।
D. पारगमन (Transduction): यह भी पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था की विशेषता है — लेकिन इसका अर्थ है विशेष से विशेष पर तर्क करना (जैसे "मैंने दोपहर नहीं सोया इसलिए आज दोपहर नहीं हुई")। यह "एक पहलू पर ध्यान" की परिभाषा से मेल नहीं खाता — वह तो Centration है।
📚 स्रोत: Piaget (1954) — The Construction of Reality in the Child; Santrock — Life-Span Development; NCERT CDP
प्रश्न 10 / 10
पियाजे के अनुसार गुणात्मक रूप से चार विभिन्न अवस्थाएँ —
✔ सही उत्तर — B. सार्वभौमिक पैटर्न का प्रतिनिधित्व
पियाजे का मानना था कि उनकी चारों अवस्थाएँ — संवेदी-चालक, पूर्व-संक्रियात्मक, मूर्त-संक्रियात्मक और औपचारिक-संक्रियात्मक — सभी संस्कृतियों और सभी बच्चों में एक ही क्रम में आती हैं। यह जैविक परिपक्वता और पर्यावरण के साथ अन्तःक्रिया पर आधारित एक सार्वभौमिक (universal) प्रक्रिया है। हालाँकि अवस्था में प्रवेश की आयु संस्कृति के अनुसार थोड़ी बदल सकती है, लेकिन क्रम कभी नहीं बदलता
✗ गलत विकल्पों का विश्लेषण
A. जेनेटिक कोड पर निर्भर: पियाजे ने केवल जैविक परिपक्वता को एक कारक माना — लेकिन विकास केवल genes पर निर्भर नहीं है; पर्यावरण के साथ सक्रिय अन्तःक्रिया भी आवश्यक है। यह अत्यधिक सरलीकरण है।
C. बच्चे = लघु वयस्क: यह पियाजे के सिद्धांत का सीधा विरोध है। पियाजे ने ही सबसे पहले यह स्थापित किया कि बच्चे "छोटे वयस्क" नहीं हैं — उनकी सोच की संरचना गुणात्मक रूप से अलग है।
D. संस्कृतियों में भिन्न: पियाजे के अनुसार अवस्थाओं का क्रम सार्वभौमिक है और संस्कृति के अनुसार नहीं बदलता। संस्कृति केवल अवस्था-प्रवेश की गति को प्रभावित कर सकती है, न कि अनुक्रम को। यह वायगोत्स्की की सोच के अधिक निकट है।
📚 स्रोत: Piaget, J. (1964); Dasen, P.R. (1977) — Cross-cultural studies on Piagetian stages; NCERT CDP; Santrock — Educational Psychology